आज के समय में जहाँ एक साधारण ब्लड टेस्ट या एक्स-रे करवाने के लिए लोगों को सैकड़ों हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं Khan Sir Hospital ने स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया में एक नई मिसाल कायम की है।
इस अस्पताल में X-Ray मात्र ₹35 और Blood Test सिर्फ ₹7 में किया जा रहा है। यह सुनकर न सिर्फ मरीज बल्कि मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग भी हैरान हैं।
महंगे इलाज के बीच सस्ती जांच की पहल khan Sir ne
भारत में स्वास्थ्य सेवाएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। प्राइवेट अस्पतालों में एक साधारण ब्लड टेस्ट का खर्च ₹300 से ₹800 तक होता है, वहीं एक्स-रे के लिए ₹500 से ₹1500 तक देने पड़ते हैं। ऐसे माहौल में इतनी कम कीमत पर जांच उपलब्ध कराना किसी चमत्कार से कम नहीं।
Khan Sir Hospital की यह पहल खासतौर पर:
- गरीब और मध्यम वर्ग
- छात्र
- दिहाड़ी मजदूर
- ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के लोगों
के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
Khan Sir Hospital:: पटना के प्रसिद्ध शिक्षक खान सर (फैजल खान) ने शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने के बाद अब स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मिसाल क़ायम की है, जिसने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है। अपनी मां से प्रेरणा लेते हुए, उन्होंने पटना में एक अत्याधुनिक अस्पताल शुरू किया है, जहां उपचार और नैदानिक परीक्षणों की दर इतनी कम है कि वे सरकारी अस्पतालों के साथ भी प्रतिस्पर्धा करते हैं।
कौन हैं Khan Sir और क्यों चर्चा में है उनका अस्पताल?
Khan Sir देश के जाने-माने शिक्षक हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए मशहूर हैं। लेकिन शिक्षा के साथ-साथ वे सामाजिक जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं।
उनका मानना है कि:
“अच्छी शिक्षा और अच्छी सेहत, दोनों हर इंसान का अधिकार हैं।”
इसी सोच के साथ उन्होंने कम लागत में बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से इस अस्पताल की शुरुआत की।
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जांच के रेट जिसने सबको चौंकाया
Khan Sir Hospital में मिलने वाली कुछ प्रमुख जांच सेवाएं:
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X-Ray: ₹35
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Blood Test (Basic): ₹7
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शुगर टेस्ट: नाममात्र शुल्क
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BP और अन्य सामान्य जांच: बेहद कम कीमत
इन रेट्स की तुलना अगर किसी भी निजी लैब से की जाए तो फर्क साफ नजर आता है।
कैसे संभव हुआ इतना सस्ता इलाज?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी कम कीमत पर जांच कैसे संभव है?
इसके पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं:
- नो-प्रॉफिट मॉडल:
अस्पताल का उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं, बल्कि सेवा देना है। - सरल व्यवस्था:
बिना फिजूल खर्च और दिखावे के अस्पताल का संचालन किया जाता है। - सीधी खरीद:
मशीनें और मेडिकल उपकरण सीधे मैन्युफैक्चरर से खरीदे जाते हैं। - सरल स्टाफ स्ट्रक्चर:
सीमित लेकिन कुशल स्टाफ के जरिए काम किया जाता है।
दूर–दूर से यात्रा करने वाले रोगियों के साथ सुबह से लंबी क़तारें। अस्पताल के गेट सुबह 9 बजे खुलते हैं लेकिन उससे पहले क़तारें पहले से ही मौजूद हैं। टोकन सुबह 11 बजे तक वितरित किए जाते हैं जिसके बाद ओपीडी शुरू होता है। निर्धारित समय के बाद आने वाले मरीज़ों को अक्सर अगले दिन तक इंतज़ार करना पड़ता है। अस्पताल रविवार को बंद रहता है। मरीज़ न केवल पटना से बल्कि पड़ोसी जिलों, अन्य राज्यों और यहां तक कि नेपाल से भी आ रहे हैं। कई रोगियों ने बताया है कि निजी अस्पतालों में परीक्षणों और दवाओं की लागत सस्ती नहीं थी, लेकिन उन्हें यहां राहत मिली।




