मुंबई की सत्ता में बड़ा उलटफेर: BJP की Ritu Tawde बनेंगी मेयर, 25 साल बाद शिवसेना बाहर
मुंबई की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता Ritu Tawde के मुंबई की अगली मेयर बनने की पूरी संभावना है। अगर यह औपचारिक रूप से घोषित होता है, तो यह शिवसेना के 25 साल लंबे मेयर शासन का अंत माना जाएगा। यह बदलाव केवल एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सत्ता संरचना में बड़ा राजनीतिक उलटफेर है।
25 साल का शिवसेना दौर खत्म होने की कगार पर
मुंबई महानगरपालिका पर शिवसेना का दबदबा लगभग ढाई दशक से बना हुआ था। 1997 से लेकर अब तक, शिवसेना ने लगातार मेयर पद पर कब्ज़ा बनाए रखा। इस दौरान पार्टी ने मुंबई को अपना सबसे मजबूत राजनीतिक गढ़ बनाया।
हालांकि, 2022 के बाद बदली राजनीतिक परिस्थितियों, आंतरिक विभाजन और गठबंधन समीकरणों ने शिवसेना की स्थिति को कमजोर कर दिया। वहीं BJP ने धीरे-धीरे BMC में अपनी पकड़ मजबूत की।
Sanjay Shankar Ghadi of the Shiv Sena will be the Deputy Mayor.
भाजपा के Ritu Tawde को मुंबई के मेयर उम्मीदवार के रूप में चुना गया है, 25 वर्षों में पहली बार यह पद शिवसेना के अलावा किसी अन्य पार्टी द्वारा आयोजित किया जाएगा।
घाटकोपर के पार्षद Ritu Tawde ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की शिक्षा समिति के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया है। 15 जनवरी के नागरिक चुनाव में वार्ड नंबर 5 से पार्षद चुने गए संजय शंकर घड़ी 15 महीने के कार्यकाल के लिए डिप्टी मेयर के रूप में कार्य करेंगे।
शिवसेनाअपनेचारनिगमोंकोअवसरदेनेकेलिएडिप्टीमेयरकेकार्यकालकोविभाजितकरेगी।गादीउननेताओंमेंसेथेजो 2022 में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पक्ष में चले गए, जिसके कारण महा विकास अघाड़ी सरकार का पतन हुआ।
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कौन हैं Ritu Tawde?
Ritu Tawde भाजपा की उभरती हुई महिला नेता मानी जाती हैं। वे संगठनात्मक कामकाज, शहरी प्रशासन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक प्रशासनिक रूप से मजबूत और संतुलित चेहरा माना जाता है।
BJP सूत्रों के अनुसार, Ritu Tawde को मेयर पद के लिए चुनना एक रणनीतिक फैसला है, ताकि मुंबई जैसे महानगर में पार्टी की पकड़ और मज़बूत हो सके।
सत्ता परिवर्तन के पीछे के बड़े कारण
इस राजनीतिक उलटफेर के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं:
1. शिवसेना का विभाजन
एकनाथ शिंदे गुट और उद्धव ठाकरे गुट के बीच विभाजन ने पार्टी की जमीनी ताकत को कमजोर किया।
2. गठबंधन समीकरणों में बदलाव
BJP ने स्थानीय स्तर पर बेहतर समीकरण बनाकर समर्थन जुटाया, जिससे शिवसेना को नुकसान हुआ।
3. शहरी मतदाताओं का रुझान
मुंबई के शहरी मतदाता अब इन्फ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपेरेंसी और विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
4. BMC पर प्रशासनिक नियंत्रण
BMC लंबे समय से प्रशासक के अधीन रही, जिससे राजनीतिक संतुलन बदल गया।
| वर्ष | पार्टी | मेयर |
|---|---|---|
| 1997–2022 | शिवसेना | लगातार |
| 2026 (संभावित) | BJP | Ritu Tawde |
भाजपा नेता अमित सातम ने Ritu Tawde की उम्मीदवारी की घोषणा की, जबकि शिवसेना नेता राहुल शेवले ने घड़ी की उम्मीदवारी की घोषणा की। 227 सदस्यीय नगर निगम के चुनाव में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी, जबकि शिवसेना ने 29 सीटों पर जीत हासिल की।
सत्तारूढ़ गठबंधन, 118 पार्षदों की संयुक्त ताक़त के साथ, 114 के आधे रास्ते के निशान को पार कर गया है और महापौर के पद को सुरक्षित करने के लिए Ritu Tawde अच्छी तरह से रखा गया है।
1997 से 25 साल तक नागरिक निकाय पर शासन करने वाली शिवसेना (यूबीटी) ने 65 सीटें जीतीं, जबकि उसके सहयोगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (पवार) ने क्रमशः छह और एक सीट जीती।शरद
निष्कर्ष
मुंबई की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। Ritu Tawde का संभावित मेयर बनना केवल BJP की जीत नहीं, बल्कि शिवसेना के लंबे प्रभुत्व का अंत भी है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सत्ता परिवर्तन मुंबई के विकास और राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।




